आरती श्री रामायण जी की | Aarti Shree Ramayan Ji Ki pdf

नमस्कार दोस्तों जैसा की आप जानते है कि श्री हरी विष्णु ही भगवान नारायण है और आप सभी कि डिमांड पर हम आपको Aarti Shree Ramayan Ji Ki pdf उपलब्ध कराने जा रहे हैं।

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामायण आरती, वह संगीतमय प्रार्थना है जो रामचरितमानस के अंश है। इसमें रामचरितमानस की महिमा का गुणगान किया गया है। संपूर्ण रामायण आरती लिखी गई है आप रामचरितमानस के पूर्व इस आरती का गुणन कर सकते हैं।

जो भी प्राणी भगवान नारायण की आरती गाता है उसकी आयु, विद्या, यश, बल बढ़ने के साथ साथ वह संपन्नता, सफलता, आरोग्य और सौभाग्य प्राप्त करता है।  उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और वह उसे सुख, ऐश्वर्य, संपदा के साथ-साथ जीवन के सभी सुख प्राप्त होते है।

॥ आरती श्री रामायण जी की॥

आरती श्री रामायण जी की।कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

गावत ब्राह्मादिक मुनि नारद।बालमीक विज्ञान विशारद।

शुक सनकादि शेष अरु शारद।बरनि पवनसुत कीरति नीकी॥

आरती श्री रामायण जी की।

कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

गावत वेद पुरान अष्टदस।छओं शास्त्र सब ग्रन्थन को रस।

मुनि-मन धन सन्तन को सरबस।सार अंश सम्मत सबही की॥

आरती श्री रामायण जी की।

कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

गावत सन्तत शम्भू भवानी।अरु घट सम्भव मुनि विज्ञानी।

व्यास आदि कविबर्ज बखानी।कागभुषुण्डि गरुड़ के ही की॥

आरती श्री रामायण जी की।

कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

कलिमल हरनि विषय रस फीकी।सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की।

दलन रोग भव मूरि अमी की।तात मात सब विधि तुलसी की॥

आरती श्री रामायण जी की।

कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

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