Original Abhigyan Shakuntalam PDF | अभिज्ञानशाकुन्तलम्

हेल्लो दोस्तों आज के इस लेख में हम आपको Original Abhigyan Shakuntalam PDF उपलब्ध कराने वाले हैं जिसे आप आसानी से अपने मोबाइल में डाउनलोड करके पढ़ सकते हैं।

यह कथा महाभारत और पद्मपुराण दोनों में मिलती है। कालीदास ने अपने इस नाटक की प्रेरणा महाभारत से ली और इस अति सुन्दर रचना को रचित किया। संस्कृत साहित्य के अनुसार भारतीय साहित्य का भी अनमोल रत्न है। अभिज्ञान शाकुन्तलम का अनुवाद अन्य कई विदेशी भाषाओँ में भी किया जा चुका है यह एक अति प्रचलित रचना है इस पुस्तक में कालिदास जी ने  शकुन्तला और राजा दुष्यन्त के प्रेम, बिछोह और फिर से मिलन पर रची गई है। 

प्राचीन भारतीय कवि कालिदास द्वारा एक संस्कृत नाटक है, जो शकुंतला में बताई गई कहानी को नाटकीय रूप से प्रस्तुत करता है। महाकाव्य महाभारत और कालिदास के कार्यों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसकी सटीक तिथि अनिश्चित है, लेकिन कालिदास को अक्सर चौथी शताब्दी ईस्वी में रखा जाता है।

अभिज्ञान शाकुंतलम् की कहानी

इस कहानी की मुख्य पात्र शकुन्तला और राजा दुष्यन्त है। शकुन्तला का जन्म स्वर्गलोक की अप्सरा मेनका के गर्भ से मुनि विश्वामित्र से हुआ था विश्वामित्र की तपस्या से स्वर्ग के राजा इन्द्र तक भयग्रस्त हो गये थे और इसलिए उन्होंने विश्वामित्र को मोहित करने और उनकी साधना को भंग करने के उद्देश्य से परम सुंदर अप्सरा मेनका को मृत्युलोक यानी की पृथ्वी पर भेजा था।

मुनि विश्वामित्र से शकुन्तला के जन्म के उपरांत ही मेनका उसको वन में छोड़कर स्वर्ग लोक में चली गई थी। जंगल व वन के पशु-पक्षियों ने बालिका का भरण-पोषण किया और एक दिन कण्व ऋषि की नजर पड़ने पर वे शकुन्तला को अपनी कुटीया में ले आए। पक्षियों द्वारा पालन-पोषण किये जाने की वजह से कण्व ऋषि ने उस कन्या का नाम ‘शकुन्तला’ रख दिया था।

क्लिक करो 👉  नमक का दरोगा | Nnamak ka Daroga PDF

कण्व ऋषि शकुन्तला को अपनी पुत्री जैसा ही स्नेह करते थे। वे हमेशा शकुन्तला के लिए उसकी मनपसंद वस्तु आश्रम में जुटाते रहे जिससे शकुन्तला अत्यंत खुश होती थी।

कालिदास द्वारा लिखित अति सुन्दर रचना अभिज्ञान शाकुंतलम में इसी शकुन्तला की जिंदगी का संक्षेप में वर्णन है। इसमें ऐसे अनेक हृदय को छूने वाले प्रसंगों का वर्णन किया गया है जिनको पश्ने मात्र से आपकी आँखों में आंसू छलक जाते  है। अभिज्ञान शाकुंतलम में पहला प्रसंग उस समय का है, जब दुष्यन्त और शकुन्तला पहली बार जंगल में मिलते है दोनों में प्रेम हो जाता है और दोनों विवाह कर लेते है। 

दूसरा प्रसंग उस समय का है, जब कण्व ऋषि शकुन्तला को अपने आश्रम से पति के घर जाने के लिए रवाना करते हैं। उस समय खुद कण्व ऋषि कहते हैं कि आज जब मेरे जैसे मुनि को अपने द्वारा सिर्फ पालन-पोषण की गई कन्या से इतनी ममता है की उसको अपने पति घर विदा करते समय मेर्रे ह्रदय को इतना दर्द हो रहा है तो जिनकी अपनी बेटियाँ पति के घर के लिए विदा होती हैं उस वक्त उनकी क्या मनोस्थिति होती होगी।

तीसरा प्रसंग है, जब शकुन्तला अपने पति दुष्यंत से मिलने के उनके राज्य में जाती है तो  दुष्यंत शकुन्तला को पहचानने से ही मना कर देते है। 

चैथा प्रसंग उस वक्त का है, जब मछली मारने वाले एक आदमी को प्राप्त दुष्यंत के नाम वाली अंगूठी शकुन्तला को दिखाई जाती जो शकुन्तला ने नहाते वक्त ऋषि के श्राप के कारण खो दी थी।

तथा पांचवाँ प्रसंग ब्रह्माजी के पुत्र मरीचि महर्षि के आश्रम में हस्तिनापुर के सम्राट दुष्यंत और शकुन्तला के मिलन का है।

क्लिक करो 👉  मैला आँचल उपन्यास | Maila Aanchal PDF

अभिज्ञान शाकुन्तलम् की कितनी प्रचलित पुस्तक है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब आज से लगभग 233 वर्ष पहले सन् 1789 में अंग्रेज लेखक विलियम जोंस ने इसका अंग्रेजी भाषा में अनुवाद किया तब उस अंग्रजी अनुवाद का जर्मन लेखक जाॅर्ज फोरेस्टर ने सन् 1891 में जर्मन भाषा में अनुवाद कर प्रकाशित करवा दिया। उस जर्मन अनुवाद को पढ़कर जर्मनी के महानतम कवि योहान वुल्फगांग फान गेटे ने अपने हृदय के भावों को जिस तरह व्यक्त किया था उसका वर्णन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा –

अभिज्ञान शाकुन्तलम् से आज कालिदास और अंग्रेजी के कवि विलियम शेक्सपियर की तुलना की जाती है। लेकिन मेरा मानना है कि यह तुलना व्यर्थ है। दोनों कवियों के समय में बहुत ज्यादा अंतर है। कालिदास जहां पुराने समय के कवि है वही विलियम शेक्सपियर उनके काफी बाद के है। अंग्रेजी साहित्य जगत में शेक्सपियर का सर्वश्रेष्ठ स्थान हो लेकिन कालिदास की कृतियों से उसकी तुलना करना न्याय संगत नहीं होगा। ऐसी तुलना कालिदास के एक अंश तक को भी छू नहीं पाती।

Abhigyan Shakuntalam PDF

अभिज्ञान शाकुंतलम, शास्त्रीय कवि कालिदास द्वारा लिखित एक मनोरम संस्कृत नाटक, भारतीय साहित्यिक विरासत का एक सच्चा रत्न है। यह कालजयी कृति मानवीय भावनाओं और प्राकृतिक दुनिया के जटिल धागों को खूबसूरती से एक साथ बुनती है।

नाटक का सारांश

अभिज्ञान शाकुंतलम राजा दुष्यंत और एक आश्रम में पली-बढ़ी एक युवा महिला शकुंतला की प्रेम कहानी के इर्द-गिर्द घूमती है। जंगल के हरे-भरे वातावरण के बीच उनका प्यार पनपता है। हालाँकि, एक श्राप के कारण शकुंतला के मन से दुष्यन्त की यादें मिट गईं। यह नाटक प्यार को फिर से खोजने और अंततः पुनर्मिलन की उनकी यात्रा का वर्णन करता है।

क्लिक करो 👉  लीलावती ग्रंथ PDF | Original Leelavati Granth in Hindi PDF

विषयों का अन्वेषण किया गया

यह नाटक प्रेम, नियति, मनुष्य और प्रकृति के बीच संबंध और स्मृति की शक्ति जैसे गहन विषयों पर प्रकाश डालता है। यह दर्शाता है कि प्यार कैसे समय और विपरीत परिस्थितियों को पार कर सकता है। मानव और प्रकृति के सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व को विभिन्न रूपकों और प्रतीकों के माध्यम से दर्शाया गया है।

चरित्र विश्लेषण

शकुंतला, नायिका, पवित्रता, मासूमियत और भक्ति का प्रतीक है। राजा दुष्यन्त एक लापरवाह राजा से एक समर्पित प्रेमी के रूप में विकसित हुए। ऋषि दुर्वासा और भरत जैसे अन्य पात्र नाटक की भावनात्मक गहराई और नैतिक शिक्षा में योगदान देते हैं।

आधुनिक साहित्य पर प्रभाव

अभिज्ञान शाकुंतलम का प्रभाव साहित्यिक इतिहास के गलियारों में गूंजता है। इसके विषयों और पात्रों ने हर युग के अनगिनत लेखकों, कवियों और कलाकारों को प्रेरित किया है। नाटक में मानवीय भावनाओं और प्राकृतिक दुनिया की खोज प्रासंगिक बनी हुई है, जिसने विश्व साहित्य पर एक अमिट छाप छोड़ी है।

निष्कर्ष

अभिज्ञान शाकुंतलम के हृदय में, कालिदास ने मानवीय भावनाओं और प्राकृतिक क्षेत्र के संलयन को अमर बना दिया। यह उत्कृष्ट कृति दर्शकों को मंत्रमुग्ध करती रहती है और प्रेम, प्रकृति और लिखित शब्द की स्थायी शक्ति की याद दिलाती है।

Leave a Comment