Anand Sahib Path PDF in Hindi

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Anand Sahib Path

॥ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

अनंदु भइआ मेरी माए सतिगुरू मै पाइआ ॥

सतिगुरु त पाइआ सहज सेती मनि वजीआ वाधाईआ ॥

राग रतन परवार परीआ सबद गावण आईआ ॥

सबदो त गावहु हरी केरा मनि जिनी वसाइआ ॥

कहै नानकु अनंदु होआ सतिगुरू मै पाइआ ॥१॥

ए मन मेरिआ तू सदा रहु हरि नाले ॥

हरि नालि रहु तू मंन मेरे दूख सभि विसारणा ॥

अंगीकारु ओहु करे तेरा कारज सभि सवारणा ॥

सभना गला समरथु सुआमी सो किउ मनहु विसारे ॥

कहै नानकु मंन मेरे सदा रहु हरि नाले ॥२॥

साचे साहिबा किआ नाही घरि तेरै ॥

घरि त तेरै सभु किछु है जिसु देहि सु पावए ॥

सदा सिफति सलाह तेरी नामु मनि वसावए ॥

नामु जिन कै मनि वसिआ वाजे सबद घनेरे ॥

कहै नानकु सचे साहिब किआ नाही घरि तेरै ॥३॥

साचा नामु मेरा आधारो ॥

साचु नामु अधारु मेरा जिनि भुखा सभि गवाईआ ॥

करि सांति सुख मनि आइ वसिआ जिनि इछा सभि पुजाईआ ॥

सदा कुरबाणु कीता गुरू विटहु जिस दीआ एहि वडिआईआ ॥

कहै नानकु सुणहु संतहु सबदि धरहु पिआरो ॥

साचा नामु मेरा आधारो ॥४॥

वाजे पंच सबद तितु घरि सभागै ॥

घरि सभागै सबद वाजे कला जितु घरि धारीआ ॥

पंच दूत तुधु वसि कीते कालु कंटकु मारिआ ॥

धुरि करमि पाइआ तुधु जिन कउ सि नामि हरि कै लागे ॥

कहै नानकु तह सुखु होआ तितु घरि अनहद वाजे ॥५॥

साची लिवै बिनु देह निमाणी ॥

देह निमाणी लिवै बाझहु किआ करे वेचारीआ ॥

तुधु बाझु समरथ कोइ नाही क्रिपा करि बनवारीआ ॥

एस नउ होरु थाउ नाही सबदि लागि सवारीआ ॥

कहै नानकु लिवै बाझहु किआ करे वेचारीआ ॥६॥

आनंदु आनंदु सभु को कहै आनंदु गुरू ते जाणिआ ॥

जाणिआ आनंदु सदा गुर ते क्रिपा करे पिआरिआ ॥

करि किरपा किलविख कटे गिआन अंजनु सारिआ ॥

अंदरहु जिन का मोहु तुटा तिन का सबदु सचै सवारिआ ॥

कहै नानकु एहु अनंदु है आनंदु गुर ते जाणिआ ॥७॥

बाबा जिसु तू देहि सोई जनु पावै ॥

पावै त सो जनु देहि जिस नो होरि किआ करहि वेचारिआ ॥

इकि भरमि भूले फिरहि दह दिसि इकि नामि लागि सवारिआ ॥

गुर परसादी मनु भइआ निरमलु जिना भाणा भावए ॥

कहै नानकु जिसु देहि पिआरे सोई जनु पावए ॥८॥

आवहु संत पिआरिहो अकथ की करह कहाणी ॥

करह कहाणी अकथ केरी कितु दुआरै पाईऐ ॥

तनु मनु धनु सभु सउपि गुर कउ हुकमि मंनिऐ पाईऐ ॥

हुकमु मंनिहु गुरू केरा गावहु सची बाणी ॥

कहै नानकु सुणहु संतहु कथिहु अकथ कहाणी ॥९॥

ए मन चंचला चतुराई किनै न पाइआ ॥

चतुराई न पाइआ किनै तू सुणि मंन मेरिआ ॥

एह माइआ मोहणी जिनि एतु भरमि भुलाइआ ॥

माइआ त मोहणी तिनै कीती जिनि ठगउली पाईआ ॥

कुरबाणु कीता तिसै विटहु जिनि मोहु मीठा लाइआ ॥

कहै नानकु मन चंचल चतुराई किनै न पाइआ ॥१०॥

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ए मन पिआरिआ तू सदा सचु समाले ॥

एहु कुट्मबु तू जि देखदा चलै नाही तेरै नाले ॥

साथि तेरै चलै नाही तिसु नालि किउ चितु लाईऐ ॥

ऐसा कमु मूले न कीचै जितु अंति पछोताईऐ ॥

सतिगुरू का उपदेसु सुणि तू होवै तेरै नाले ॥

कहै नानकु मन पिआरे तू सदा सचु समाले ॥११॥

अगम अगोचरा तेरा अंतु न पाइआ ॥

अंतो न पाइआ किनै तेरा आपणा आपु तू जाणहे ॥

जीअ जंत सभि खेलु तेरा किआ को आखि वखाणए ॥

आखहि त वेखहि सभु तूहै जिनि जगतु उपाइआ ॥

कहै नानकु तू सदा अगमु है तेरा अंतु न पाइआ ॥१२॥

सुरि नर मुनि जन अम्रितु खोजदे सु अम्रितु गुर ते पाइआ ॥

पाइआ अम्रितु गुरि क्रिपा कीनी सचा मनि वसाइआ ॥

जीअ जंत सभि तुधु उपाए इकि वेखि परसणि आइआ ॥

लबु लोभु अहंकारु चूका सतिगुरू भला भाइआ ॥

कहै नानकु जिस नो आपि तुठा तिनि अम्रितु गुर ते पाइआ ॥१३॥

भगता की चाल निराली ॥

चाला निराली भगताह केरी बिखम मारगि चलणा ॥

लबु लोभु अहंकारु तजि त्रिसना बहुतु नाही बोलणा ॥

खंनिअहु तिखी वालहु निकी एतु मारगि जाणा ॥

गुर परसादी जिनी आपु तजिआ हरि वासना समाणी ॥

कहै नानकु चाल भगता जुगहु जुगु निराली ॥१४॥

जिउ तू चलाइहि तिव चलह सुआमी होरु किआ जाणा गुण तेरे ॥

जिव तू चलाइहि तिवै चलह जिना मारगि पावहे ॥

करि किरपा जिन नामि लाइहि सि हरि हरि सदा धिआवहे ॥

जिस नो कथा सुणाइहि आपणी सि गुरदुआरै सुखु पावहे ॥

कहै नानकु सचे साहिब जिउ भावै तिवै चलावहे ॥१५॥

एहु सोहिला सबदु सुहावा ॥

सबदो सुहावा सदा सोहिला सतिगुरू सुणाइआ ॥

एहु तिन कै मंनि वसिआ जिन धुरहु लिखिआ आइआ ॥

इकि फिरहि घनेरे करहि गला गली किनै न पाइआ ॥

कहै नानकु सबदु सोहिला सतिगुरू सुणाइआ ॥१६॥

पवितु होए से जना जिनी हरि धिआइआ ॥

हरि धिआइआ पवितु होए गुरमुखि जिनी धिआइआ ॥

पवितु माता पिता कुट्मब सहित सिउ पवितु संगति सबाईआ ॥

कहदे पवितु सुणदे पवितु से पवितु जिनी मंनि वसाइआ ॥

कहै नानकु से पवितु जिनी गुरमुखि हरि हरि धिआइआ ॥१७॥

करमी सहजु न ऊपजै विणु सहजै सहसा न जाइ ॥

नह जाइ सहसा कितै संजमि रहे करम कमाए ॥

सहसै जीउ मलीणु है कितु संजमि धोता जाए ॥

मंनु धोवहु सबदि लागहु हरि सिउ रहहु चितु लाइ ॥

कहै नानकु गुर परसादी सहजु उपजै इहु सहसा इव जाइ ॥१८॥

जीअहु मैले बाहरहु निरमल ॥

बाहरहु निरमल जीअहु त मैले तिनी जनमु जूऐ हारिआ ॥

एह तिसना वडा रोगु लगा मरणु मनहु विसारिआ ॥

वेदा महि नामु उतमु सो सुणहि नाही फिरहि जिउ बेतालिआ ॥

कहै नानकु जिन सचु तजिआ कूड़े लागे तिनी जनमु जूऐ हारिआ ॥१९॥

जीअहु निरमल बाहरहु निरमल ॥

बाहरहु त निरमल जीअहु निरमल सतिगुर ते करणी कमाणी ॥

कूड़ की सोइ पहुचै नाही मनसा सचि समाणी ॥

जनमु रतनु जिनी खटिआ भले से वणजारे ॥

कहै नानकु जिन मंनु निरमलु सदा रहहि गुर नाले ॥२०॥

जे को सिखु गुरू सेती सनमुखु होवै ॥

होवै त सनमुखु सिखु कोई जीअहु रहै गुर नाले ॥

गुर के चरन हिरदै धिआए अंतर आतमै समाले ॥

आपु छडि सदा रहै परणै गुर बिनु अवरु न जाणै कोए ॥

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कहै नानकु सुणहु संतहु सो सिखु सनमुखु होए ॥२१॥

जे को गुर ते वेमुखु होवै बिनु सतिगुर मुकति न पावै ॥

पावै मुकति न होर थै कोई पुछहु बिबेकीआ जाए ॥

अनेक जूनी भरमि आवै विणु सतिगुर मुकति न पाए ॥

फिरि मुकति पाए लागि चरणी सतिगुरू सबदु सुणाए ॥

कहै नानकु वीचारि देखहु विणु सतिगुर मुकति न पाए ॥२२॥

आवहु सिख सतिगुरू के पिआरिहो गावहु सची बाणी ॥

बाणी त गावहु गुरू केरी बाणीआ सिरि बाणी ॥

जिन कउ नदरि करमु होवै हिरदै तिना समाणी ॥

पीवहु अम्रितु सदा रहहु हरि रंगि जपिहु सारिगपाणी ॥

कहै नानकु सदा गावहु एह सची बाणी ॥२३॥

सतिगुरू बिना होर कची है बाणी ॥

बाणी त कची सतिगुरू बाझहु होर कची बाणी ॥

आखि वखाणी ॥कहदे कचे सुणदे कचे कची

हरि हरि नित करहि रसना कहिआ कछू न जाणी ॥

चितु जिन का हिरि लइआ माइआ बोलनि पए रवाणी ॥

कहै नानकु सतिगुरू बाझहु होर कची बाणी ॥२४॥

गुर का सबदु रतंनु है हीरे जितु जड़ाउ ॥

सबदु रतनु जितु मंनु लागा एहु होआ समाउ ॥

सबद सेती मनु मिलिआ सचै लाइआ भाउ ॥

आपे हीरा रतनु आपे जिस नो देइ बुझाइ ॥

कहै नानकु सबदु रतनु है हीरा जितु जड़ाउ ॥२५॥

सिव सकति आपि उपाइ कै करता आपे हुकमु वरताए ॥

हुकमु वरताए आपि वेखै गुरमुखि किसै बुझाए ॥

तोड़े बंधन होवै मुकतु सबदु मंनि वसाए ॥

गुरमुखि जिस नो आपि करे सु होवै एकस सिउ लिव लाए ॥

कहै नानकु आपि करता आपे हुकमु बुझाए ॥२६॥

सिम्रिति सासत्र पुंन पाप बीचारदे ततै सार न जाणी ॥

ततै सार न जाणी गुरू बाझहु ततै सार न जाणी ॥

तिही गुणी संसारु भ्रमि सुता सुतिआ रैणि विहाणी ॥

गुर किरपा ते से जन जागे जिना हरि मनि वसिआ बोलहि अम्रित बाणी ॥

कहै नानकु सो ततु पाए जिस नो अनदिनु हरि लिव लागै जागत रैणि विहाणी ॥२७॥

माता के उदर महि प्रतिपाल करे सो किउ मनहु विसारीऐ ॥

मनहु किउ विसारीऐ एवडु दाता जि अगनि महि आहारु पहुचावए ॥

ओस नो किहु पोहि न सकी जिस नउ आपणी लिव लावए ॥

आपणी लिव आपे लाए गुरमुखि सदा समालीऐ ॥

कहै नानकु एवडु दाता सो किउ मनहु विसारीऐ ॥२८॥

जैसी अगनि उदर महि तैसी बाहरि माइआ ॥

माइआ अगनि सभ इको जेही करतै खेलु रचाइआ ॥

जा तिसु भाणा ता जमिआ परवारि भला भाइआ ॥

लिव छुड़की लगी त्रिसना माइआ अमरु वरताइआ ॥

एह माइआ जितु हरि विसरै मोहु उपजै भाउ दूजा लाइआ ॥

कहै नानकु गुर परसादी जिना लिव लागी तिनी विचे माइआ पाइआ ॥२९॥

हरि आपि अमुलकु है मुलि न पाइआ जाइ ॥

मुलि न पाइआ जाइ किसै विटहु रहे लोक विललाइ ॥

ऐसा सतिगुरु जे मिलै तिस नो सिरु सउपीऐ विचहु आपु जाइ ॥

जिस दा जीउ तिसु मिलि रहै हरि वसै मनि आइ ॥

हरि आपि अमुलकु है भाग तिना के नानका जिन हरि पलै पाइ ॥३०॥

हरि रासि मेरी मनु वणजारा ॥

हरि रासि मेरी मनु वणजारा सतिगुर ते रासि जाणी ॥

हरि हरि नित जपिहु जीअहु लाहा खटिहु दिहाड़ी ॥

एहु धनु तिना मिलिआ जिन हरि आपे भाणा ॥

कहै नानकु हरि रासि मेरी मनु होआ वणजारा ॥३१॥

ए रसना तू अन रसि राचि रही तेरी पिआस न जाइ ॥

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पिआस न जाइ होरतु कितै जिचरु हरि रसु पलै न पाइ ॥

हरि रसु पाइ पलै पीऐ हरि रसु बहुड़ि न त्रिसना लागै आइ ॥

एहु हरि रसु करमी पाईऐ सतिगुरु मिलै जिसु आइ ॥

कहै नानकु होरि अन रस सभि वीसरे जा हरि वसै मनि आइ ॥३२॥

ए सरीरा मेरिआ हरि तुम महि जोति रखी ता तू जग महि आइआ ॥

हरि जोति रखी तुधु विचि ता तू जग महि आइआ ॥

हरि आपे माता आपे पिता जिनि जीउ उपाइ जगतु दिखाइआ ॥

गुर परसादी बुझिआ ता चलतु होआ चलतु नदरी आइआ ॥

कहै नानकु स्रिसटि का मूलु रचिआ जोति राखी ता तू जग महि आइआ ॥३३॥

मनि चाउ भइआ प्रभ आगमु सुणिआ ॥

हरि मंगलु गाउ सखी ग्रिहु मंदरु बणिआ ॥

हरि गाउ मंगलु नित सखीए सोगु दूखु न विआपए ॥

गुर चरन लागे दिन सभागे आपणा पिरु जापए ॥

अनहत बाणी गुर सबदि जाणी हरि नामु हरि रसु भोगो ॥

कहै नानकु प्रभु आपि मिलिआ करण कारण जोगो ॥३४॥

ए सरीरा मेरिआ इसु जग महि आइ कै किआ तुधु करम कमाइआ ॥

कि करम कमाइआ तुधु सरीरा जा तू जग महि आइआ ॥

जिनि हरि तेरा रचनु रचिआ सो हरि मनि न वसाइआ ॥

गुर परसादी हरि मंनि वसिआ पूरबि लिखिआ पाइआ ॥

कहै नानकु एहु सरीरु परवाणु होआ जिनि सतिगुर सिउ चितु लाइआ ॥३५॥

ए नेत्रहु मेरिहो हरि तुम महि जोति धरी हरि बिनु अवरु न देखहु कोई ॥

हरि बिनु अवरु न देखहु कोई नदरी हरि निहालिआ ॥

एहु विसु संसारु तुम देखदे एहु हरि का रूपु है हरि रूपु नदरी आइआ ॥

गुर परसादी बुझिआ जा वेखा हरि इकु है हरि बिनु अवरु न कोई ॥

कहै नानकु एहि नेत्र अंध से सतिगुरि मिलिऐ दिब द्रिसटि होई ॥३६॥

ए स्रवणहु मेरिहो साचै सुनणै नो पठाए ॥

साचै सुनणै नो पठाए सरीरि लाए सुणहु सति बाणी ॥

जितु सुणी मनु तनु हरिआ होआ रसना रसि समाणी ॥

सचु अलख विडाणी ता की गति कही न जाए ॥

कहै नानकु अम्रित नामु सुणहु पवित्र होवहु साचै सुनणै नो पठाए ॥३७॥

हरि जीउ गुफा अंदरि रखि कै वाजा पवणु वजाइआ ॥

वजाइआ वाजा पउण नउ दुआरे परगटु कीए दसवा गुपतु रखाइआ ॥

गुरदुआरै लाइ भावनी इकना दसवा दुआरु दिखाइआ ॥

तह अनेक रूप नाउ नव निधि तिस दा अंतु न जाई पाइआ ॥

कहै नानकु हरि पिआरै जीउ गुफा अंदरि रखि कै वाजा पवणु वजाइआ ॥३८॥

एहु साचा सोहिला साचै घरि गावहु ॥

गावहु त सोहिला घरि साचै जिथै सदा सचु धिआवहे ॥

सचो धिआवहि जा तुधु भावहि गुरमुखि जिना बुझावहे ॥

इहु सचु सभना का खसमु है जिसु बखसे सो जनु पावहे ॥

कहै नानकु सचु सोहिला सचै घरि गावहे ॥३९॥

अनदु सुणहु वडभागीहो सगल मनोरथ पूरे ॥

पारब्रहमु प्रभु पाइआ उतरे सगल विसूरे ॥

दूख रोग संताप उतरे सुणी सची बाणी ॥

संत साजन भए सरसे पूरे गुर ते जाणी ॥

सुणते पुनीत कहते पवितु सतिगुरु रहिआ भरपूरे ॥

बिनवंति नानकु गुर चरण लागे वाजे अनहद तूरे ॥४०॥१॥

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