Bade Bhai Sahab Class 10 PDF

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तो चलिए इसको डाउनलोड करने से पहले इसकी जल्दी से समरी पढ़ लेते हैं जिससे आपको ये आईडिया हो जायेगा कि Bade Bhai Sahab Class 10 PDF के अन्दर आपको क्या मिलने वाला है।

Bade Bhai Sahab Summary

मेरे भाई साहब मुझसे पॉँच साल बडे थे, लेकिन सिर्फ तीन दरजे ही मुझसे आगे हैं। उन्‍होने भी उसी उम्र में पढना शुरू किया था जब मैने शुरू किया; लेकिन पढाई जैसे महत्‍वपूर्ण मामले में वह जल्‍दीबाजी से काम लेना पसंद नहीं करते थे। वह  बुनियाद खूब मजबूत करना चाहते थे। एक साल का काम दो साल में करते थे। बड़ा भाई 2 साल फेल हो चुका था।

इसलिए वह लेखक से केवल तीन कक्षा आगे था। लेखक हमेशा अपने भाई को किताबे खोलकर बैठा देखा करता था परंतु उसका दिमाग कहीं और होता था। वह अपनी कॉपी और किताबों पर चिड़िया कबूतर आदि बनाया करता था। लेखक का मन पढ़ाई में बहुत कम लगता था इसलिए वह मौका पाते ही हॉस्टल से निकलकर खेलने लगता था।

परंतु घर पहुंचते ही उसे बड़े भाई का रूद्र रूप देखना पड़ता था उसके सामने लेखक मौन धारण कर लेता था। वार्षिक परीक्षा हुई तब बड़े भाई साहब फिर से फेल हो गए और लेखक अपनी कक्षा में प्रथम आया। लेखक के मन में आया कि वह बड़े भाई को खूब सुनाएं लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।

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बड़े भाई का फेल होना देखकर वह निडर हो गया और मैदान में जाकर खेलने लगा। भाई साहब बोले कि मैं देख रहा हूं कि कक्षा में प्रथम आने पर तुम्हें घमंड हो गया है मेरे फेल होने पर ना जाओ मेरी कक्षा में पहुंचेंगे तो पता चलेगा। अगले साल बड़ा भाई फिर से फेल हो गया जबकि लेखक दर्जे में प्रथम आया।

इस साल बड़े भाई ने खूब मेहनत की फिर भी वह फेल हो गया। यह देखकर लेखक को बड़े भाई साहब पर दया आने लगी अब सिर्फ एक ही कक्षा का अंतर दोनों में रह गया था। भाई बोला मैं तुम से 5 साल बड़ा हूं। तुम मेरे तजुर्बे की बराबरी नहीं कर सकते। तुम चाहे कितनी पढ़ाई क्यों ना कर लो समझ किताबें पढ़ने से नहीं आती है।

हमारे दादा और अम्मा कोई अधिक पढ़े लिखे नहीं हैं। फिर भी हम पढ़े-लिखे को समझाने का हक उनका है। लेखक को बड़े भाई की यह नई युक्ति बहुत अच्छी लगी वहां उसके सामने झुक गया। उसे सचमुच अनुभव हुआ और वह बोला आपको कहने का पूरा अधिकार है बड़े भाई साहब। या सुनते ही बड़े भाई साहब और लेखक गले लग गए और दोनों हॉस्टल की और चल पड़े।

Bade Bhai Sahab Class 10 PDF

परिचय

हिंदी बड़े भाई साहब प्रसिद्ध हिंदी लेखक प्रेमचंद द्वारा लिखित एक लघु कहानी है। कहानी दो भाइयों के बीच के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनमें बड़ा भाई उच्च शिक्षित है और छोटा भाई अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए संघर्ष कर रहा है।

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कथानक

कहानी भारत के एक छोटे से गाँव पर आधारित है। बड़े भाई, जिन्हें बड़े भाई साहब के नाम से जाना जाता है, एक उच्च शिक्षित व्यक्ति हैं जिन्होंने देश के सर्वश्रेष्ठ स्कूलों में पढ़ाई की है। दूसरी ओर, उसका छोटा भाई अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए संघर्ष कर रहा है और उसके खराब प्रदर्शन के कारण अक्सर उसके माता-पिता उसे डांटते हैं।

निस्र्पण

दोनों भाइयों का व्यक्तित्व बहुत अलग है। बड़े भाई साहब उच्च शिक्षित, परिष्कृत और अच्छे वक्ता हैं। गांव में हर कोई उनका सम्मान करता है और उन्हें एक आदर्श के रूप में देखा जाता है। दूसरी ओर, छोटा भाई सरल, अशिक्षित है और उसमें आत्मविश्वास की कमी है।

विषय

कहानी का मुख्य विषय शिक्षा का महत्व है। यह कहानी दोनों भाइयों के बीच स्पष्ट अंतर को उजागर करती है और कैसे शिक्षा ने उनके जीवन को आकार देने में प्रमुख भूमिका निभाई है। यह यह भी दर्शाता है कि शिक्षा किस प्रकार सामाजिक गतिशीलता का एक उपकरण हो सकती है और गरीबी के चक्र को तोड़ने में मदद कर सकती है।

निष्कर्ष

अंत में, हिंदी बड़े भाई साहब एक शक्तिशाली कहानी है जो किसी के जीवन को आकार देने में शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालती है। यह एक ऐसी कहानी है जो जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों को प्रभावित करती है और यह याद दिलाती है कि शिक्षा एक शक्तिशाली उपकरण है जो व्यक्तियों को उनके सपनों और आकांक्षाओं को प्राप्त करने में मदद कर सकती है।

‘बड़े भाई साहब’ कहानी प्रेमचंद द्वारा रचित एक प्रसिद्ध कहानी है। प्रेमचंद जी की कहानियाँ हमेशा शिक्षाप्रद रही हैं। उन्होंने अपनी कहानियों के माध्यम से किसी-न-किसी समस्या पर प्रहार किया है और लोगों को सामने सबक प्रस्तुत किया है।

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बड़े भाई साहब समाज में समाप्त हो रहे, कर्तव्यों के अहसास को दुबारा जीवित करने का प्रयास मात्र है। इस कहानी में बड़े भाई साहब अपने कर्तव्यों को संभालते हुए, अपने भाई के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा कर रहे हैं। उनकी उम्र इतनी नहीं है, जितनी उनकी ज़िम्मेदारियाँ है।

लेकिन उनकी ज़िम्मेदारियाँ उनकी उम्र के आगे बहुत छोटी नज़र आती हैं। वह स्वयं के बचपन को छोटे भाई के लिए तिलाजंलि देते हुए भी नहीं हिचकिचाते हैं। उन्हें इस बात का अहसास है कि उनके गलत कदम छोटे भाई के भविष्य को बिगाड़ सकते हैं। फिर भी वह अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ करने से तनिक भी नहीं चूकते।

एक चौदह साल के बच्चे द्वारा उठाया गया कदम छोटे भाई के उज्जवल भविष्य की नींव रखता है। यही आदर्श बड़े भाई को छोटे भाई के सामने और भी ऊँचा बना देते हैं। यह कहानी हमें सीख देती है कि मनुष्य उम्र से नहीं अपने किए गए कामों और कर्तव्यों से बड़ा होता है।

वर्तमान युग में मनुष्य विकास तो कर रहा है परन्तु आदर्शों को भूलता जा रहा है। भौतिक सुख एकत्र करने की होड़ में हम अपने आदर्शों को छोड़ चुके हैं। हमारे लिए आज भौतिक सुख ही सब कुछ है। अपने से छोटे और बड़ों के प्रति हमारी ज़िम्मेदारियाँ हमारे लिए आवश्यक नहीं है। प्रेमचंद ने इन्हीं कर्तव्यों के महत्व को सबके सम्मुख रखा है।

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