Ganpati Aarti PDF | गणपती आरती संग्रह PDF

नमस्कार दोस्तों उम्मीद करते है आप लोग खुश होगे और पूजा पाठ में अपना ध्यान लगा रहे होंगे आज का लेख विशेष है क्यों की की आज एस लेख में हम जानेगे विग्नहर्ता श्री गणेश जी की आरती Ganpati Aarti PDF. यदि आप सम्पूर्ण गणेश आरती हिंदी, English, या मराठी में (Ganpati aarti in hindi) पढ़ना चाहते है तो आप यहाँ पढ़ सकते हैं, साथ ही गणेश आरती pdf (Ganpati aarti in hindi PDF) को अपने फ़ोन या कंप्यूटर पर भी डाउनलोड कर सकते है। और जब भी आपके पास समय हो या मन अशांत सा लगे तो आप इसे बिना internet के भी पढ़ सकते हैं 

गणेश जी को उनके पिता महादेव का वरदान प्राप्त है कि किसी भी पूजा में सबसे पहले गणेश जी की पूजा होगी तभी वह पूजा व अर्चना सफल और पूर्ण होगी। इसलिए जब भी आप पूजा करे सबसे पहले प्रथम पूज्य श्री गणेश जी की पूजा करे।

गणेश जी की आरती कैसे करें?

गणेश जी की पूजा के लिए सबसे पहले गणेश मूर्ति को स्नान कराकर साफ़ आसन पर रखकर वस्त्र, फूल, रोली और दूब अर्पण करे| प्रसाद मे लडडू, मोदक और मौसमी फल रखे | गणेश जी को मोदक और दूब अति प्रिय है| देसी घी का दीपक जलाए| गणेश जी आरती (Jai Ganesh Jai Ganesh Deva Aarti) करने के समय सबसे पहले उनसे प्रार्थना करते है की वो अपनी कृपा हम पर करे| मंत्र पाठ के बाद सच्चे मन से गणेश जी को ध्यान करते हुए गणेश जी की आरती उतारें|

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Ganpati Aarti न सिर्फ आपके मन को शांत करती है  बल्कि यदि आप  अपने आपको प्रभु के चरणों में समर्पित करते हुए Ganpati Aarti  पढ़ते है तो निश्चित ही धन धान्य, कीर्ति में बढ़ोतरी होती है|

Ganpati Aarti PDF

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।

माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।

लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

Ganesh Ji Ki Aarti Lyrics in English

Jai Ganesh Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva ।

Mata Jaaki Parvati, Pita Mahadeva ।।

Ekadant Dayaavant, Charabhujadhari ।

Maathe Par Tilak Sohe, Moose Ki Savari ।।

Jai Ganesh Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva ।

Mata Jaaki Parvati, Pita Mahadeva ।।

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Paan Chadhe Phool Chadhe, Aur Chadhe Meva ।

Ladduan Ka Bhog Lage, Sant Karen Seva ।।

Jai Ganesh Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva ।

Mata Jaaki Parvati, Pita Mahadeva ।।

Andhan Ko Aankh Det, Kodhin Ko Kaaya ।

Baanjhan Ko Putr Det, Nirdhan Ko Maaya ।।

Jai Ganesh Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva ।

Mata Jaaki Parvati, Pita Mahadeva ।।

“Soor” Shyaam Sharan Aae, Saphal Keeje Seva ।

Jai Ganesh Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva ।

Mata Jaaki Parvati, Pita Mahadeva ।।

Deenan Ki Laaj Rakho, Shambhu Sutakari ।

Kaamana Ko Poorn Karo, Jaoon Balihari ।।

Ganpati Aarti Marathi pdf | गणपति की आरती

सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची |

नुरवी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची |

सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची |

कंठी झळके माळ मुक्ताफळाची || १ ||

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती |

दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ||

रत्नखचित फरा तूज गौरीकुमरा |

चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा |

हिरे जडित मुकुट शोभतो बरा |

रुणझुणती नुपुरे चरणी घागरिया || 2 ||

लंबोदर पितांबर फनी वरवंदना |

सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना |

दास रामाचा वाट पाहे सदना |

संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवंदना |

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती |

दर्शनमात्रे मनकामना पुरती || ३ ||

इस आरती में “सुखकर्ता दुखहर्ता” श्लोक सबके मन और मुख में है। ऐसा माना जाता है कि इस श्लोक में भगवान गणेश के सभी गुण समाहित हैं। इस आरती का दूसरा छंद “जय देव, जय देव, जय मंगलमूर्ति” आरती करने वाले सभी लोगों के दिलों में उत्साह जगाता है और उनकी प्रार्थना उत्कट होती है।

यह आरती एक छंद के साथ शुरू होती है, “गणेशवंदना जयगणेश जयगणेश देवा”। आरती करने के बाद, लोग उत्साहपूर्वक “गंगाजल प्रणीत निर्मल द्रव्य निर्मल वस्त्र बोलो गणपति बप्पा मोरया” का पाठ करते हैं।

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इस आरती में कई श्लोक हैं जिनमें भगवान गणेश के महत्व और गुणों का उल्लेख किया गया है। “अम्बिकेतनाय नमो नमो” श्लोक देवी पार्वती की स्तुति में है। कविता “जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा” भगवान गणेश के विभिन्न नामों की स्तुति करती है।

इस आरती के अंतिम भाग “मंगलमूर्ति मोरया” शब्दों के साथ मंगल को समाप्त करते हैं। इस आरती के अंत में, लोग भगवान गणेश की छवि को विसर्जित करते हुए “गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया” शब्दों का जाप करते हैं।

अंतिम शब्द

गणपति की आरती में श्री गणेश जी महाराज जिन्हें , विनायक, विघ्नहर्ता और लम्बोदर सहित विभिन्न नामों से जाना जाता है उनकी  स्तुति की जाती है। आरती में भगवान गणेश के महत्व और गुणों का उल्लेख है जो लोगों को आशीर्वाद देते हैं और उनके दुखों को हरते हैं।

गणपति आरती क्या है?

गणपति आरती एक धार्मिक संगीत है जो आरती करने वाले व्यक्ति के अनुभव में त्रिवेणी को प्रकाशित करती है। जिसमे एक व्यक्ति अपनी भावना के आधार पर गणपति आरती करता है।

गणपति की आरती किस समय की जाती है?

वैसे तो गणपति आरती सुबह के समय करना उत्तम माना जाता है, साथ ही मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को शाम को गणपति आरती गाई जाती है, खासकर गणेशोत्सव के अवसरों पर।

गणपति की आरती का पाठ कैसे करें ?

गणपति आरती का पाठ अपनी पसंद के अनुसार कर सकते है। उसके लिए, आप इस आरती को मधुर स्वर में पढ़ सकते हैं और पढ़ने के लिए बाजन यंत्रों का उपयोग कर सकते हैं।

गणपति आरती के शब्द कैसे समझें ?

गणपति आरती के शब्दों का अर्थ शब्दकोश में पा सकते हैं। आप आरती पढ़ते समय विभिन्न रुचियों के अनुसार अर्थ पा सकते हैं।

गणपति आरती में संगीत कैसा है?

गणपति आरती का संगीत अति सुंदर और प्रसिद्ध है। यह राग मल्हार और तीन तालों के माध्यम से संगीत में आया है। इस पर आधारित कई गीत हैं और वे सभी सुंदर गायक हैं।

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