Hanuman Ji Ki Aarti in Hindi PDF

जन्म लेते ही सूर्य को निगलने के लिए उडान भरने की कथा से यह स्पष्ट होता है कि वायुपुत्र (वायुतत्त्व से उत्पन्न) हनुमान, सूर्य पर (तेजतत्त्व पर) विजय प्राप्त करने में सक्षम थे। पृथ्वी, आप, तेज, वायु एवं आकाश तत्त्वों में से वायुतत्त्व तेजतत्त्व की अपेक्षा अधिक सूक्ष्म है अर्थात अधिक शक्तिमान है ।

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर किसी जातक की कुंडली में मंगल ग्रह कमजोर है तो उसे हनुमान जी की आरती करनी चाहिए। मान्यता है कि मंगलवार को हनुमान जी की आरती करने से हनुमान जी खुश होते हैं। यदि घर में नियमित रूप से हनुमान जी की आरती होती है तो इससे घर में किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं कर पाती। इसके साथ ही घर में सुख समृद्धि का वास होता है। 

हनुमान जी की आरती हिंदी में

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।

अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।

दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।

लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।

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पैठी पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।

बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।

कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।

लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।

जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।

हनुमानजी को संगीत शास्त्र का एक प्रमुख प्रवर्तक माना गया है । संभवतः इसका कारण है उनके एवं रुद्र के बीच का संबंध । उन्हें रुद्र का अवतार मानते हैं । रुद्र शिव का एक रूप है । यद्यपि हनुमान शिवके अवतार हैं, तथापि राम की उपासना के कारण उनमें विष्णुतत्त्व की मात्रा अधिक हो गई है । शिव के डमरू से नाद उत्पन्न हुआ, इसलिए शिव को संगीत का प्रवर्तक माना जाता है । हनुमान की जन्मजात गायन प्रतिभा के कारण समर्थ रामदासस्वामी जी ने उन्हें ‘संगीतज्ञानमहंता’की उपाधि दी।


चिरंजीवी
अपने विभिन्न अवतारों में प्रभु श्रीराम तो वही रहते हैं, परंतु प्रत्येक अवतार में हनुमान का स्थान कोई और ले लेता है । हनुमान सप्तचिरंजीवों में से एक हैं, फिर भी चार युगों के अंत में ये सप्तचिरंजीव मोक्ष को प्राप्त होते हैं एवं इन का स्थान सात आध्यात्मिक दृष्टि से) अति उन्नत व्यक्ति ले लेते हैं ।

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