लीलावती ग्रंथ PDF | Original Leelavati Granth in Hindi PDF

नमस्कार दोस्तों, आज के इस लेख में हाम आपको लीलावती ग्रंथ के विषय में बताने वाले हैं यह एक प्रसिद ग्रन्थ है लीलावती, भारतीय गणितज्ञ भास्कर द्वितीय द्वारा सन ११५० ईस्वी में संस्कृत में रचित, गणित और खगोल शास्त्र का एक प्राचीन ग्रन्थ है, इसमें 625 श्लोक हैं साथ ही यह सिद्धान्त शिरोमणि का एक अंग भी है। लीलावती में अंकगणित का विवेचन किया गया है। आप यहाँ से लीलावती ग्रंथ PDF को आसानी से डाउनलोड कर पायेंगें क्यूंकि हमने आपके लिए Original Leelavati Hindi Book PDF उपलब्ध कराई गई है। 

🔖 किताब का नाम लीलावती ग्रंथ
✍️ लेखकभास्कराचार्य
🗣️ भाषा हिंदी
📖 पेज संख्या378
📥 फ़ाइल साइज़25.6 MB

जानिए लीलावती गणितज्ञ के विषय में

अधिकांश लोग महान गणितज्ञ लीलावती के नाम से परीचित नहीं हैं। आज विश्व के सैंकड़ो देश जिस गणित की महान पुस्तक से गणित को पढ़ा रहे हैं, उसकी रचयिता गणितज्ञ भास्कराचार्य हैं, जो कि उनकी बेटी महान विदुषी गणितज्ञा लीलावती के नाम पर रखा गया था। 

भारतवर्ष में गणित की जड़ें बहुत पुरानी और गहरी हैं। लीलावती पेड़ के पत्ते तक गिन लेती थीं।12 वी शताब्दी में लीलावती जानी-मानी गणितज्ञ थीं।

जहाँ आज भारतीय नारी समाज में अपनी जगह बनाने में लगी हैं और फिर से अपने को स्थापित करने में लगी, 

वहीं प्राचीन काल में भारतीय नारी प्रायः सभी विषयों में रूचि लेती थी. सिर्फ रूचि ही नहीं, वो उन विषयों की सभाओ में भाग लेती थीं। लीलावती गणित विद्या की आचार्या थीं. जिस समय पाश्चात्य लोग शायद पढ़ने-लिखने की कल्पना तक नहीं करते थे, उस समय उसने गणित के ऐसे-ऐसे सिद्धांत सोच डाले, जिन पर आधुनिक गणितज्ञों की भी बुद्धि चकरा जाती है।

क्लिक करो 👉  पूस की रात प्रेमचंद | Poos Ki Raat PDF In Hindi

लीलावती दुर्भाग्यवश शीघ्र ही वैधव्य को प्राप्त हो गई थी। इस आकस्मिक घटना से पिता और पुत्री दोनों के धैर्य का बांध टूट गया। लीलावती अपने पिता के घर में ही रहने लगी। पुत्री का दु:ख दूर करने के लिए उनके पिता भास्कराचार्य ने उसे गणित पढ़ाना आरंभ किया। उसने भी गणित के अध्ययन में ही शेष जीवन की उपयोगिता समझी। 

थोड़े ही दिनों में वह उक्त विषय में पूर्ण ज्ञानी हो गई। भास्कराचार्य ने अपनी बेटी लीलावती को गणित सिखाने के लिए गणित के ऐसे सूत्र निकाले थे जो काव्य में होते थे। वे सूत्र कंठस्थ करना होते थे। उसके बाद उन सूत्रों का उपयोग करके गणित के प्रश्न हल करवाए जाते थे।

कंठस्थ करने के पहले भास्कराचार्य लीलावती को सरल भाषा में, धीरे-धीरे समझा देते थे। वे बच्ची को प्यार से संबोधित करते चलते थे, “हिरन जैसे नयनों वाली प्यारी बिटिया लीलावती, ये जो सूत्र हैं…।” बेटी को पढ़ाने की इसी शैली का उपयोग करके भास्कराचार्य ने गणित का एक महान ग्रंथ लिखा, उस ग्रंथ का नाम ही उन्होंने “लीलावती” रख दिया।

आजकल गणित एक शुष्क विषय माना जाता है, पर भास्कराचार्य का ग्रंथ ‘लीलावती‘ गणित को भी आनंद के साथ मनोरंजन, जिज्ञासा आदि का सम्मिश्रण करते हुए कैसे पढ़ाया जा सकता है, इसका उत्कृष्ट नमूना है। 

लीलावती का एक उदाहरण देखें- ‘निर्मल कमलों के एक समूह के तृतीयांश, पंचमांश तथा षष्ठमांश से क्रमश: शिव, विष्णु और सूर्य की पूजा की, चतुर्थांश से पार्वती की और शेष छ: कमलों से गुरु चरणों की पूजा की गई। अये, बाले लीलावती, शीघ्र बता कि उस कमल समूह में कुल कितने फूल थे..?’

क्लिक करो 👉  Original Abhigyan Shakuntalam PDF | अभिज्ञानशाकुन्तलम्

इसे भी पढ़ें :- मैलाआँचल प्रशिद्ध प्रेम कथा

लीलावती ने उत्तर दिया ‘१२० कमल के फूल।’

“पिताजी, यह पृथ्वी, जिस पर हम निवास करते हैं, किस पर टिकी हुई है?” लीलावती ने शताब्दियों पूर्व यह प्रश्न अपने पिता भास्कराचार्य से पूछा था।

इसके उत्तर में भास्कराचार्य ने कहा, “ लीलावती, कुछ लोग जो यह कहते हैं कि यह पृथ्वी शेषनाग, कछुआ या हाथी या अन्य किसी वस्तु पर आधारित है, तो वे गलत कहते हैं। 

यदि यह मान भी लिया जाए कि यह किसी वस्तु पर टिकी हुई है, तो भी प्रश्न बना रहता है कि वह वस्तु किस पर टिकी हुई है और इस प्रकार कारण का कारण और फिर उसका कारण… लीलावती ने कहा-‘फिर भी यह प्रश्न रहता है पिताजी, कि यह पृथ्वी किस चीज पर टिकी है?’ तब भास्कराचार्य ने कहा, ‘क्या हम यह नहीं मान सकते कि पृथ्वी किसी भी वस्तु पर आधारित नहीं है।….. यदि हम यह कहें कि पृथ्वी अपने ही बल से टिकी है और इसे धारणात्मिका शक्ति कह दें तो क्या दोष है?’ इस पर लीलावती ने पूछा यह कैसे संभव है?

तब भास्कराचार्य सिद्धान्त की बात कहते हैं कि वस्तुओं की शक्ति बड़ी विचित्र है

-मरुच्लो भूरचला स्वभावतो यतो विचित्रावतवस्तु शक्त्य:।।(सिद्धांत शिरोमणी गोलाध्याय-भुवनकोश।) आगे कहते हैं-आकृष्टिशक्तिश्च मही तया यत् खस्थं

गुरुस्वाभिमुखं स्वशक्तत्या।आकृष्यते तत्पततीव भाति समेसमन्तात् क्व पतत्वियंखे।। (सिद्धांत शिरोमणी गोलाध्याय-भुवनकोश।) 

अर्थात् पृथ्वी में आकर्षण शक्ति है। पृथ्वी अपनी आकर्षण शक्ति से भारी पदार्थों को अपनी ओर खींचती है और आकर्षण के कारण वह जमीन पर गिरते हैं, पर जब आकाश में समान ताकत चारों ओर से लगे, तो कोई कैसे गिरे? अर्थात् आकाश में ग्रह निरावलम्ब रहते हैं क्योंकि विविध ग्रहों की गुरुत्व शक्तियां संतुलन बनाए रखती हैं।

क्लिक करो 👉  नमक का दरोगा | Nnamak ka Daroga PDF

ऐसे श्लोकों को श्रीभास्कराचार्य जी ने अपनी आत्मजा के नाम पर स्वरचित ग्रंन्थ “लीलावती” में संकलित किया था और वे स्वयं इस महान ग्रन्थ को वैदिक साहित्य से सम्बद्ध मानते है।

यह विडंबना है कि आजकल हम अपने अतीत को भुलाकर यह मान बैठे हैं कि न्यूटन ने ही सर्वप्रथम गुरुत्वाकर्षण की खोज की, परन्तु भास्कराचार्य ( 1114-1185 ) ने यह वैदिक दर्शन के आधार पर बता दिया था।

भास्कराचार्य जितने उच्चकोटि के वैज्ञानिक गणितज्ञ थे, उसी प्रकार उनकी पुत्री लीलावती भी विदुषी थीं, जिनको गढ़ने का श्रेय उनके पिता को ही जाता है।

तो दोस्तों ये थी पूरी कहानी लीलावती ग्रंथ तो अगर आप लीलावती ग्रंथ को पढने के लिए आप इसे अपने फोन में Original Leelavati Hindi Book PDF को प्राप्त कर सकते हैं

यह विडंबना है कि आजकल हम अपने अतीत को भुलाकर यह मान बैठे हैं कि न्यूटन ने ही सर्वप्रथम गुरुत्वाकर्षण की खोज की, परन्तु भास्कराचार्य ( 1114-1185 ) ने यह वैदिक दर्शन के आधार पर बता दिया था।

Original Leelavati Hindi Book PDF


👇👇👇


निष्कर्ष

उम्मीद करता हूँ कि आप सभी लोगों को लीलावती ग्रंथ PDF मिल गयी होगी और आपने उसे डाउनलोड भी कर लिया होगा आपको ये Leelavati Granth in Hindi कैसा लगा पढ़कर हमें जरुर बताएं।

Leave a Comment