108+ Panchatantra Stories PDF in Hindi

इस लेख में Panchatantra Stories PDF in Hindi का विस्तार से वर्णन किया गया है। यह आप जान गये होंगे पंचतंत्र का क्या अर्थ है?,पंचतंत्र में कुल कितनी कहानियां या कथाएं हैं?, पंचतंत्र के पांच भेद कौन-कौन से हैं?,पंचतंत्र की सबसे अच्छी कहानी कौन सी है?

🔖 किताब का नामपंचतंत्र की कहानियां
🗣️ भाषाहिंदी
📖 पेज संख्या217
📥 फ़ाइल साइज़11.3 MB
📜 उपलब्ध है हाँ ✅

Panchatantra Stories PDF पंचतंत्र क्या है ?

भारत का साहित्य जितना पुराना है, उतनी ही पुरानी इसकी लोक कथायें हैं हम सब ने कभी न कभी अपनी दादी नई से ऐसे kahaniya जरुर सुनी होंगी जिसके अंत में हमे एक अच्छी से सीख मिलती है उन्हें पंचतंत्र की कहानिया कहा जाता है पचतंत्र एक किताब है जिसमे पशु पक्षियों की ढेरों कहानियो का संग्रह है। 

ये कथाय संसार भर में प्रसिद्ध हैं। विश्व की बीस भाषाओं में इनके अनुवाद हो चुके हैं। सबसे पहले इनका अनुवाद छठी शताब्दी में हुआ था। तब से अब तक यूरोप की हर भाषा में इनका अनुवाद हुआ है। इन कहानियों के माध्यम से हमे जीवन की महत्वपूर्ण बाते सीखने को मिलती है जो हमे जीवन में बहुत काम आती है इसका इतिहास कुछ इस प्रकार है। 

एक समय महिलारोप्य नाम का एक नगर हुआ करता था उस नगर का राजा जिसका नाम अमरशक्ति था बहुत महान  था। लेकिन उनके तीन पुत्र थे जिनका नाम बहुशक्ति, उग्रशक्ति, अनेकशक्ति था राजा उनसे बहुत परेशान था क्योंकि वह बहुत मुर्ख थे। एक दिन राजा ने परेशांन होकर और उन्हें पढाई लिखाई से  विमुख देख एक सभा बुलाई और अपने मंत्रियों से कहा-

“आप लोग जानते हैं कि मेरे तीन पुत्र बुद्धि हीन हैं उनमे से कोई भी मेरे बाद राजपाठ सँभालने योग्य नहीं है। इसलिए कोई ऐसा उपाए कीजिये जिससे इनकी बुद्धि का विकास किया जा सके”।

तभी एक पंडित बोले- “महाराज सिर्फ़ व्याकरण का अध्ययन करने में ही बारह वर्ष का समय लग जायेगा और उसके बाद शास्त्र आदि का ज्ञान दिया जाता है जिससे बुद्धि का विकास होता है”।

इसपर एक मंत्री बोलता है – “महाराज यह जीवन नाशवान है इसलिए हमें किसी छोटे और बुद्धि का विकास करने वाले शास्त्र के बारे  विचार करना चाहिए। 

राजा कहता है – “क्या यह संभव है कि बहुत कम समय में ही सभी शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त हो सके। क्या तुम किसी ऐसे विद्वान को जानते हो। 

मंत्री ने कहा – हाँ मैं ऐसे विद्वान को जनता हूँ जो बहुत ही कम समय  में आपके पुत्रो को बुद्धिमान बना सकता है उनका नाम पंडित विष्णु शर्मा है। 

राजा के कहने पर अगले दिन विष्णु शर्मा को राजा के सामने पेश किया जाता है। राजा ने विष्णुशर्मा को अपनी दुविधा सुनाई। 

इसपर विष्णुशर्मा ने  कहा- “राजन मैं आपके पुत्रों को केवल छः महीने में ही बुद्धिमान और शास्त्रों के ज्ञाता बना दूंगा”। 

राजा यह बात सुनकर बहुत खुश हुआ और कहा – “अगर आप ऐसा कर सकते हो तो मैं आपको 50 गांव इनाम के तौर पर दूंगा”। 

वीष्णुशर्मा ने कहा – राजा मुझे कुछ नहीं चाहिए बल्कि अगर मैं ऐसा नहीं कर पाया तो अपना नाम बदल दूंगा। इस तरह विष्णुशर्मा ने उनके तीनो पुत्रों को मात्र छः महीने में ही शास्त्रों के ज्ञाता और बुद्धिमान बनाया। 

विष्णु शर्मा ने सभी शास्त्रों के अध्ययन को पांच भागों में बाँट दिया था जो बहुत छोटे थे। इसलिए इसे पंचतंत्र का नाम दिया गया है। 

पंचतंत्र के ये पांच भाग हैं –

  1. मित्रभेद  (मित्रों में मनमुटाव एवं अलगाव )
  2. मित्रसम्प्राप्ति (मित्र प्राप्ति एवं उसके लाभ)
  3. काकुलुकीय  (कौवे एवं उल्लुओं की कथा)
  4. ळब्दप्रनाश  (मृत्यु या विनाश के आने पर)
  5. अपरीक्षितकारक  (हड़बड़ी में क़दम न उठायें)

एक ब्राह्मण का सपना पंचतंत्र की कहानी

यह कहानी एक ब्राह्मण की है जो लोगों के घर जाता और पूजा पाठ किया करता था। एक दिन उसे दक्षिण में ढ़ेर सारा सत्तू मिला। वह उस सत्तू को पाकर बहुत

ही खुश हुआ। घर जाकर वह उसमे से आधा सत्तू खा गया और बचे हुए सत्तू को एक मटके में सुरक्षित रखकर टांग दिया।

मटके को ऊपर लटकाने के बाद वह आराम से खटिए पर सो गया। जैसे ही उसकी आंख लगी तो नींद में वह तरह-तरह के सपने (ख्वाब) देखने लगा। उसने अपने सपने में देखा कि वह बचे हुए सत्तू को संभाल कर रखेगा और जैसे ही अकाल पड़ेगा तो सत्तू का दाम बहुत अधिक बढ़ जाएगा। फिर वह उन बचे हुए सत्तू को बेच देगा। सत्तू को बचने के बाद उसे बहुत सारे पैसे मिलेंगे और उन पैसों से वह एक बकरी खरीदेगा। फिर उस बकरी को बड़ा करके उसे भी बेच देगा। इसके बाद उन मिले हुए पैसों से वह एक गाय खरीदेगा। 

वह उस खरीदी हुई गाय का काफी अच्छे से देखभाल करेगा और उस गाय के दूध को बेचकर और अधिक पैसे कमाएगा और दूध बेचकर कमाए हुए पैसों से घोड़े और भैंस खरीदेगा। इसके बाद भैंस और घोड़ों को बेचकर वह और अधिक पैसे कमाएगा और उन पैसों से सोना खरीदेगा।

और फिर जैसे हि सोने का दाम काफी अधिक बढ़ जाएगा तो वह खरीदे हुए सोने को बेचकर और अधिक धन कमाएगा। उन पैसों से वह बड़ी जमीन खरीदेगा और एक बहुत बड़ा घर बनवाएगा। इसके बाद वह एक सुंदर सी लड़की से शादी करेगा।

शादी कर लेने के बाद जब उसके बच्चे होंगे, तो वह दूर से बैठकर अपने खेलते हुए बच्चों को देखेगा। जब उसका बच्चा रोएगा तो वह चिल्लाकर अपनी पत्नी से बोलेगा कि तुम बच्चे का ध्यान ठीक से नहीं रख सकती क्या।

यह सब देखकर वह बहुत खुश हो रहा था। उसने यह भी देखा कि जब उसकी पत्नी जब काम कर रही होगी और वह उसे कोई काम करने को बोलेगा और जब वह उसकी बात नहीं मानेगी, तो वह उठकर उसे लात मारेगा और जब वह ख़्वाब देख रहा था तभी लेटे-लेटे उसने अपना पैर ऊपर की ओर दे मारा, जहां पर उसने सत्तू को संभाल का लटका रखा था। उसका पैर सीधे सत्तू के मटके पर लगा। इसकी वजह से सत्तू का मटका नीचे गिरकर टूट गया और पूरा सत्तू गिरकर बर्बाद हो गया। ब्राह्मण की नींद जब खुली तो उसने देखा कि उसका सत्तू का मटका टूट कर गिर गया और उसका पूरा ख़्वाब बर्बाद हो गया।

विद्यार्थी और शेर पंचतंत्र की कहानी

एक छोटे शहर में चार ब्राह्मण विद्यार्थी रहा करते थे। वे सभी एक-दूसरे के काफी अच्छे मित्र थे। उनमें से तीन दोस्त पढ़ाई-लिखाई में बहुत अच्छे थे और साथ ही बहुत चालाक और चतुर थे। चौथा विद्यार्थी पढ़ाई में अच्छा नहीं था लेकिन उसे दुनियादारी की काफी अच्छी समझ थी। एक दिन उन चारों दोस्तों में से एक ने बोला, “अगर हम लोग राजाओं के दरबार में जाए तो अपनी बुद्धि और समझ के बल पर बहुत सोहरत और पैसा कमा सकते हैं।” सभी दोस्तों ने उसकी बात को मानी और यात्रा पर निकल गए।

रास्ते में उन्हें शेर की खाल और कुछ हड्डियाँ पड़ी हुई मिलीं। एक विद्यार्थी जोश में आकर बोला, “हमें अपने ज्ञान और बुद्धि की परीक्षा करनी चाहिए। चलो इस शेर को फिर से जीवित करने की कोशिश करते हैं। उसने बोला कि मैं इसके कंकाल को ठीक तरह से व्यवस्थित कर सकता हूँ।” फिर दूसरे दोस्त ने बोला कि “मैं कंकाल में माँस और खून भर सकता हूँ,” और इसके साथ तीसरे विद्यार्थी ने भी शेखी बघारी और बोला कि “मैं इसके शरीर में जान डाल सकता हूँ और यह  मरा हुआ शेर फिर से जीवित हो जाएगा।”

चौथे विद्यार्थी यह सब सुनकर चुप रहा उसने कुछ नहीं बोल और चुपचाप तीनों विद्यार्थियों की बातें सुनता रहा। कुछ समय बाद उसने अपना सिर हिलाया और कहा, “ठीक है, तुम लोगों को जो जैसा लगे, वैसा करो। किंतु पहले मुझे किसी पेड़ पर चढ़ जाने दो। तुम लोग बहुत होशियार हो। मुझे तुम सब के बुद्धि और ज्ञान पूरा विश्वाश है। तुम लोग इस मरे हुए शेर को अवश्य जिंदा कर लोगे और शीघ्र ही यह मरा हुआ शेर जीवित होकर दहाड़ मारने लगेगा। हालाँकि मुझे इस बात पर पूरा विश्वास है कि तुम लोग इस शेर का स्वभाव बिल्कुल भी नहीं बदल पाओगे।

उसने कहा कि शेर कभी घास नहीं खा खाता, जैसे मेमना कभी माँस नहीं खाता।” बाकी सभी विद्यार्थी उसकी बात सुनकर हँसने लगे और उससे कहा कि “तुम डरपोक हो, क्योंकि तुम्हें अपनी जान गँवाने का डर है। शर्म करो! तुम्हें हमारे बुद्धि और ज्ञान पर तनिक भरोसा नही है, किंतु तुम यह नहीं जानते  कि हम लोग जिस भी जानवर को जीवित करेंगे, वह पूरी तरह हमारे इशारों पर ही कार्य करेगा। हम जिस जानवर को जीवत करेंगे, वह जानवर भला हम लोगो पर क्यों हमला करेगा?

खैर, तुम्हारी जैसी मर्जी,तुम चाहते हो तो छिप जाओ और हमारा कमाल देखो!” ओर वह विद्यार्ती दौड़कर एक बड़े से पेड़ पर चढ़ गया। उसके सारे मित्र उसे देखकर फिर से हँसने लगे। जब तीसरे विद्यार्थी ने उस मरे हुए शेर के शरीर में जान डाली तो शेर दहाड़ मारकर खड़ा हो गया। जीवित होते ही वह तीनों विद्यार्थियों पर झपटा और उन्हें मारकर खा गया। चौथे विद्यार्थी ने ईश्वर को धन्यवाद दिया और कहा कि उसने उसे दुनियादारी की इतनी समझ दी कि उसने ईश्वर और उसके बनाए हुऐ प्राणियों के काम में दखल नहीं दिया।

नीचे पंचतंत्र की कहानियों की लिस्ट नीचे (108 Panchatantra Stories PDF in Hindi) सारणी में दी गई हैं। साथ ही कुछ प्रमुख कहानियों की सूची नीचे दी गई है।

  • विद्यार्थी और शेर
  • एक ब्राह्मण का सपना
  • खीला खींचने वाले एक बन्दर की कहानी 
  • सियार और दुन्दुभि
  • सिंहनी और सियार के बच्चे की कहानी 
  • दंतिल और गोरंभ की कहनी 
  • सियार और दूती आदि की कहानी 
  • विष्णु का रूप धारण करने वाले बुनकर
  • गौरय्या और बंदर की कथा
  • बगुला, काले सांप और नेवले की कथा
  • लोहे की तराजू और बनिएं की कथा
  • राजा और बंदर की कथा
  • परिव्राजक और चूहे की कथा
  • शाण्डिली द्वारा तिल-चूर्ण बेचने की कथा
  • भील, सूअर और सियार की कथा
  • राज-कन्या की कथा
  • कौओं के जोड़े और काले नाग की कथा                                               
  • सिंह और खरगोश की कथा
  • नील के बरतन में गिरे हुए सियार की कथा
  • सिंह, ऊँट, सियार और कौए की कथा
  • काठ से गिरे हुए कछुए की कहानी
  • कौओं और उल्लुओं के बीच पुराने वैर की कहानी
  • सेमिलक और छिपे धन की कथा
  • बैल के पीछे-पीछे चलने वाले सियार की कहानी 
  • धर्मबुद्धी और उसके मित्र की कहानी 
  • मेढक और काले सांप की कहानी 
  • खरगोश और हाथी की कहानी 
  • गौरय्या और खरगोश की कहानी 
  • तीन धूर्तों और ब्राह्नण की कहानी 
  • ब्राह्ण और साँप की कहानी 
  • सोने के हंस और सोने की चिड़िया की कथा
  • बूढ़े बनिये की स्त्री और चोर की कहानी
  • ब्राह्नण, चोर और पिशाच की कहानी 
  • सिंह, सियार और गुफा की कहानी 
  • सिंह और गधे की कहानी 
  • युधिष्ठिर कुम्हार की कथा
  • सोने की बीट देने वाले पक्षी और शिकारी की कथा
  • काले साँप और चींटी की कहनी 
  • मूर्ख पंडित की कहानी 
  • गधे और धोबी की कहानी 
  • कुत्ते की कहानी 
  • चकधर की कहानी


पंचतंत्र में कुल कितनी कहानियां हैं?

पंचतंत्र में कुल 87 कथाएँ हैं। जिनमें से अधिकांश प्राणी कथाएं हैं।

पंचतंत्र की सबसे अच्छी कहानी कौन सी है?

पंचतंत्र की प्रमुख कहानियां :-
चुहिया का स्वयंवर
ब्राह्मण और ठग
खटमल और कीड़ा
कौवे की चालाकी
मित्रता
बोलने वाली गुफा
शेर और चूहे की कहानी
जैसे को तैसा

पंचतंत्र के पांच तंत्र कौन से हैं?

मित्रभेद (मित्रों में मनमुटाव एवं अलगाव)
मित्रलाभ या मित्रसम्प्राप्ति (मित्र प्राप्ति एवं उसके लाभ)
काकोलुकीयम् (कौवे एवं उल्लुओं की कथा)
लब्धप्रणाश (हाथ लगी चीज (लब्ध) का हाथ से निकल जाना (हानि))
अपरीक्षित कारक (जिसको परखा नहीं गया हो उसे करने से पहले सावधान रहें ; हड़बड़ी में कदम न उठायें)

Leave a Comment