पूस की रात प्रेमचंद | Poos Ki Raat PDF In Hindi

पूस की रात महान हिंदी लेखक मुंशी प्रेमचंद की एक बहुत प्रसिद्ध कहानी है। और आप इस लेख से Poos Ki Raat PDF In Hindi को प्राप्त कर पायेंगें। 

जिसमे हल्कू एक गरीब किसान है जिस पर अपने मालिक सहना का पैसा बकाया है। हल्कू और उसकी पत्नी जो भी काम करते है, उसका अधिकांश हिस्सा उसके मालिक के पास जाता है, क्योंकि उधार के पैसे पर ब्याज दर इतनी अधिक है कि हल्कू को लगता है कि वह पूरा कर्ज कभी चुका नहीं पाएगा। 

इधर सहना पैसे की मांग करते हुए हल्कू के घर के बाहर इंतजार करती है। हल्कू किसी तरह एक नया कंबल खरीदने के लिए तीन रुपये बचा पाया था क्योंकि उसे रात में अपने खेत की देखभाल करने खेत जान पड़ता था शर्दी का मौसम था इसलिए कंबल की जरूरत थी। उसकी पत्नी, इस बचाए हुए पैसे को मालिक को देने के लिए तैयार नही  थी, लेकिन हल्कू जोर देकर कहता है कि ठंडी रातें मालिक की प्रताड़ना से बेहतर हैं। वह सहना को पैसे दे देता है। 

अँधेरी और बेहद सर्द रात में हल्कू अपने खेत में पहुँच जाता है। वह खोई से बनी छप्पर के नीचे एक खाट में बैठ जाता है। खाट के नीचे उसका कुत्ता जबरा पड़ा है, जो रात की ठंडी लहरों के कारण रो रहा है, उसका चुप करना मुश्किल है। धूम्रपान करते हुए हल्कू अपने भाग्य को कोस रहा है और उसे रात की ठंड में खेत की रखवाली करना मुश्किल हो रहा है। 

वह अपने शरीर के बीच अपना चेहरा छुपाता है लेकिन कोई फायदा नहीं होता है, वह हाथ रगड़ता है और मुड़ता रहता है लेकिन उसे कोई गर्मी नहीं मिलती है। वह मनुष्य और पशु के बीच के सारे भेदों को भूलकर कुत्ते को अपने बिस्तर पर बुलाता है और उसे गले लगाता है। हल्कू को थोड़ी गर्मी मिलती है लेकिन जल्द ही कुत्ते को खेत में किसी की आहट महसूस होती है और वह खेत में दौड़ते हुए भौंकने लगता है। 

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हल्कू को अचानक याद आता है की उनके खेत से कुछ दूरी पर आम का बाग है और वहां पर आम के सूखे पत्ते है तो वह हल्की मसूर की फसल से एक झाड़ू तैयार करता है और गिरे हुए पत्तों के ढेर को इक्कठा कर देता है और उसमे आग लगता है। आग लगाने के बाद, वह कुत्ते को आग के पास पकड़कर लाता है। अब दोनों मिलकर आग की गर्मी महसूस करते है अब वह राहत महसूस करता है। 

हल्कू इतना खुश होता है कि उसे नींद का अहसास होता है और वह खेत की देखभाल करना भूल जाता है। जैसे ही वह सोता है वैसे ही कई जानवारों का एक झुण्ड खेत में आया था । शायद नील गायों का झुण्ड था । उनके कूदने-दौडने की आवजें साफ कान में आ रही थी । फिर ऐसा मालूम हुआ कि वे खेत में चर रही हैं । जबरा तो भौंकता रहा । फिर भी हल्कू को उठने का मन नहीं हुआ । जबरा भौंकता रहा लेकिन  नील गायें खेत का सफाया कर दिया । 

हल्कू शांती  से चादर ओढकर सो गया । उधर नील गायों ने रात भर चरकर खेती की सारी फसल को बरबाद किया था । उसकी पत्नी रोते हुए उसे डाट रही थी उससे कहा-‘…तुम यहाँ आकर रम गये । और उधर सारा खेत सत्य नाश हो गया ।…’ दोनों खेत के पास आ गये । मुन्नी ने उदास होकर कहा-अब मजूरी करके पेट पालना पडेगा । हल्कू ने खुश होकर कहा-‘रात की ठण्ड में यहाँ सोना तो न पडेगा । उसे ऐसी खेती करने से मजूरी करना बहुत हद तक आरामदायक है। अब वह मजदूरी करके सबके कर्ज चुकाएगा

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