शिव चालीसा Shiv Chalisa in PDF Hindi

दोस्तों आज इस लेख में आज आप Shiv Chalisa pdf के विषय में विस्तार से जानेगें साथ ही Shiv Chalisa pdf in hindi, shiv chalisa in pdf शिव चालीसा पीडीएफ भी Download कर सकते है और अपने mobile में रख कर आसानी से कहीं भी बिना internet के पढ़ सकते हैं।

हिंदू धर्म में त्रिदेवों ब्रह्मा विष्णु महेश- ये तीन देवता ब्रह्मांड के आदि देव के रूप में जाने जाते हैं। ब्रह्म देव इस संसार का निर्माण करते हैं। 

भगवान विष्णु संसार का पालन करते हैं तथा भगवान शंकर सबसे जल्दी प्रसन्न हो जाने वाले देवता हैं। इसीलिए भगवान शंकर के विषय में कहा जाता है क्षणे रुष्टः क्षणे तुष्टः। 

अर्थात पल भर में प्रसन्न हो जाने वाले एवं पल भर में रुष्ट हो जाने वाले भगवान शंकर अपने भक्तों के लिए सदैव वर देने वाले माने गये हैं। भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए उनके भक्त भगवान शिव की विभिन्न प्रकार से पूजा अर्चना करते हैं। 

शिव की पूजा करने के लिए शिव चालीसा का पाठ करना विशेष फलदाई माना जाता है। हिंदू धर्म में चालीसा ग्रंथों का क्रम बहुत प्राचीन रहा है। चालीसा अत्यंत सरल होती है। जिसका पाठ सामान्य व्यक्ति भी कर सकता है। 

शिव पुराण से अनुकूलित, इसमें 40 (चालीस) चौपाई (छंद) शामिल हैं और शैवों और शिव के उपासकों द्वारा प्रतिदिन या महा शिवरात्रि जैसे विशेष त्योहारों पर पाठ किया जाता है।

शिव चालीसा Shiv Chalish in PDF Hindi

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन,मंगल मूल सुजान।

कहत अयोध्यादास तुम,देहु अभय वरदान॥

॥ चौपाई ॥

जय गिरिजा पति दीन दयाला।

सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके।

कानन कुण्डल नागफनी के॥

अंग गौर शिर गंग बहाये।

मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे।

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छवि को देखि नाग मन मोहे॥

मैना मातु की हवे दुलारी।

बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।

करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे।

सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ।

या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा।

तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥

किया उपद्रव तारक भारी।

देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

तुरत षडानन आप पठायउ।

लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥

आप जलंधर असुर संहारा।

सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।

सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥

किया तपहिं भागीरथ भारी।

पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं।

सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

वेद माहि महिमा तुम गाई।

अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला।

जरत सुरासुर भए विहाला॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई।

नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा।

जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

सहस कमल में हो रहे धारी।

कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई।

कमल नयन पूजन चहं सोई॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।

भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी।

करत कृपा सब के घटवासी॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।

भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।

येहि अवसर मोहि आन उबारो॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।

संकट ते मोहि आन उबारो॥

मात-पिता भ्राता सब होई।

संकट में पूछत नहिं कोई॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी।

आय हरहु मम संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदा हीं।

जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी।

क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

शंकर हो संकट के नाशन।

मंगल कारण विघ्न विनाशन॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।

शारद नारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमः शिवाय।

सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

जो यह पाठ करे मन लाई।

ता पर होत है शम्भु सहाई॥

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ॠनियां जो कोई हो अधिकारी।

पाठ करे सो पावन हारी॥

पुत्र होन कर इच्छा जोई।

निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे।

ध्यान पूर्वक होम करावे॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा।

ताके तन नहीं रहै कलेशा॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।

शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥

जन्म जन्म के पाप नसावे।

अन्त धाम शिवपुर में पावे॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी।

जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

॥ दोहा ॥

नित्त नेम उठि प्रातः ही,पाठ करो चालीसा।

तुम मेरी मनोकामना,पूर्ण करो जगदीश॥

मगसिर छठि हेमन्त ॠतु,संवत चौसठ जान।

स्तुति चालीसा शिवहि,पूर्ण कीन कल्याण॥

यदि आप शिव चालीसा पीडीएफ डाउनलोड करना चाहते हैं तो नीचे Shiv Chalisa in PDF का डाउनलोड लिंक दिया गया है। जिस पर क्लिक करके आप आसानी से Shiv Chalisa PDF का डाउनलोड कर सकते है। 

Shiv Chalisa in English

शिव चालीसा भगवान भोलेनाथ को समर्पित एक अत्यधिक प्रभावशाली स्तुति है जिसके नियमित पाठ से व्यक्ति विभिन्न प्रकार के आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं। शिव – शम्भू भोलेनाथ को कालों की काल महाकाल के रूप में भी पूजा जाता है।

|| Doha ||

Jai Ganesh Girija Suvan

Mangal Mul Sujan

Kahat Ayodhya Das

Tum Dey Abhaya Varadan

|| Chopai ||

Jai Girija Pati Dinadayala

Sada Karat Santan Pratipala

Bhala Chandrama Sohat Nike

Kanan Kundal Nagaphani Ke

Anga Gaur Shira Ganga Bahaye

Mundamala Tan Chhara Lagaye

Vastra Khala Baghambar Sohain

Chhavi Ko Dekha Naga Muni Mohain

Maina Matu Ki Havai Dulari

Vama Anga Sohat Chhavi Nyari

Kara Trishul Sohat Chhavi Bhari

Karat Sada Shatrun Chhayakari

Nandi Ganesh Sohain Tahan Kaise

Sagar Madhya Kamal Hain Jaise

Kartik Shyam Aur Gana rauo

Ya Chhavi Ko Kahi Jata Na Kauo

Devan Jabahi Jaya Pukara

Tabahi Dukha Prabhu Apa Nivara

Kiya Upadrav Tarak Bhari

Devan Sab Mili Tumahi Juhari

Turata Shadanana Apa Pathayau

Luv nimesh Mahi Mari Girayau

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Apa Jalandhara Asura Sanhara

Suyash Tumhara Vidit Sansara

Tripurasur Sana Yudha Machai

Sabhi Kripakar Lina Bachai

Kiya Tapahin Bhagiratha Bhari

Purahi Pratigya Tasu Purari

Darpa chod Ganga thabb Aayee

Sevak Astuti Karat Sadahin

Veda Nam Mahima Tav Gai

Akatha Anandi Bhed Nahin Pai

Pragati Udadhi Mantan te Jvala

Jarae Sura-Sur Bhaye bihala

Mahadev thab Kari Sahayee,

Nilakantha Tab Nam Kahai

Pujan Ramchandra Jab Kinha

Jiti Ke Lanka Vibhishan Dinhi

Sahas Kamal Men Ho Rahe Dhari

Kinha Pariksha Tabahin Purari

Ek Kamal Prabhu Rakheu goyee

Kushal-Nain Pujan Chahain Soi

Kathin Bhakti Dekhi Prabhu Shankar

Bhaye Prasanna Diye-Ichchhit Var

Jai Jai Jai Anant Avinashi

Karat Kripa Sabake Ghat Vasi

Dushta Sakal Nit Mohin Satavai

Bhramat Rahe Man Chain Na Avai

Trahi-Trahi Main Nath Pukaro

Yahi Avasar Mohi Ana Ubaro

Lai Trishul Shatrun Ko Maro

Sankat Se Mohin Ana Ubaro

Mata Pita Bhrata Sab Hoi

Sankat Men Puchhat Nahin Koi

Swami Ek Hai Asha Tumhari

Ai Harahu Ab Sankat Bhari

Dhan Nirdhan Ko Deta Sadahin

Arat jan ko peer mitaee,

Astuti Kehi Vidhi Karai Tumhari

Shambhunath ab tek tumhari

Dhana Nirdhana Ko Deta Sadaa Hii

Jo Koi Jaanche So Phala Paahiin

Astuti Kehi Vidhi Karon Tumhaarii

Kshamahu Naatha Aba Chuuka Hamaarii

Shankar Ho Sankat Ke Nashan

Vighna Vinashan Mangal Karan

Yogi Yati Muni Dhyan Lagavan

Sharad Narad Shisha Navavain

Namo Namo Jai Namah Shivaya

Sura Brahmadik Par Na Paya

Jo Yah Patha Karai Man Lai

To kon Hota Hai Shambhu Sahai

Riniyan Jo Koi Ho Adhikari

Patha Karai So Pavan Hari

Putra-hin Ichchha Kar Koi

Nischaya Shiva Prasad Tehin Hoi

Pandit Trayodashi Ko Lavai

Dhyan-Purvak Homa Karavai

Trayodashi Vrat Kare Hamesha

Tan Nahin Take Rahe Kalesha

Dhoop Diipa Naivedya Chadhaave

Shankara Sammukha Paatha Sunaave

Janma Janma Ke Paapa Nasaave

Anta Dhaama Shivapura Men Paave

 || Dohaa ||

Nitya Nema kari Pratahi

Patha karau Chalis

Tum Meri Man Kamana

Purna Karahu Jagadisha

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